I salute to karauli Collector Mr.Manoj Kumar Sharma I.A.S.

लड़कियों के लिए करौली कलेक्टर की अनूठी पहल, ‘मुझे कुछ कहना है’ करौली जिला कलेक्टर ने बालिकाओं में साहस और आत्मविश्वास जगाने के लिए एक अनोखी पहल की  है. जिला कलेक्टर मनोज कुमार शर्मा का कहना है कि अब किसी भी बच्ची को अगर कोई पीड़ा है तो वह अपने अंदर छिपाकर न रखे. वह उसे जिला प्रशासन को भी बताए. इसमें बच्ची का नाम गुप्त रखा जाएगा. इसके लिए ‘मुझे कुछ कहना है’ पहल शुरू की है. जिला प्रशासन की इस पहल का समूचे जिले में न सिर्फ स्वागत किया है बल्कि अब बच्चियां भय से मुक्त होकर अपना जीवन यापन कर सकती हैं. ‘
###  लेटर बॉक्स भी मां-बाप की तरह ‘###
कलेक्टर शर्मा का कहना है कि जिले में कोई भी बच्ची हृदय में कुंठा धारण कर चिन्ता से अकेली घुट-घुट कर नहीं जले और अपना नाम उजागर करके और गुप्त रखकर भी जिला प्रशासन से ‘मुझे कुछ कहना है’ के माध्यम से अपनी सीधी पुकार इस तरह कर सकती है जैसे एक बेटी अपने मां-बाप के समक्ष अपनी पीड़ा का इजहार करती है. जिला प्रशासन द्वारा रखवाया गया यह लेटर बॉक्स भी मां-बाप की तरह है और लेटर बॉक्स के माध्यम से बच्चियां अपनी व्यथा की कथा सहज, सरल और सामान्य तरीके से व्यक्त करने के लिए खुले मन से आमंत्रित हैं. ‘
###  पुरूषों की अपेक्षा स्त्रियों में 4 गुना बुद्धि ज्यादा’ ###
शर्मा ने बुधवार को राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय करौली में    “मुझे कुछ कहना है”  कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने उपस्थित बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 13 से 18 साल की बालिका सम्पूर्ण व्यक्तित्व के विकास का आधार होती हैं. उन्होंने कहा कि पुरूषों की अपेक्षा स्त्रियों में चार गुना बुद्धि और 6 गुणा साहस ज्यादा होता है. देश में बालिकाएं शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, खेल एवं रक्षा के क्षेत्र में नाम रोशन कर रही हैं.
###   बालिकाओं को दिलवाई शपथ ###
जिला कलेक्टर ने कहा कि ‘मुझे कुछ कहना है’ बॉक्स जिले के उपखण्ड स्तरीय विद्यालयों में रखवाए जाएंगे, जिनमें स्कूली बालिकाएं अपनी समस्याओं, रचनात्मक विचारों, उद्गारों एवं सकारात्मक सुझावों के बारे में सादे पत्र पर लिखकर स्कूल में रखे बॉक्स में डाल सकती हैं. उन्होंने कहा कि पत्रों का निराकरण तीन लोगों की कमेटी जिसमें उपखण्ड अधिकारी, समकक्ष पुलिस अधिकारी एवं संबंधित प्रधानाचार्यों के माध्यम से किया जाएगा. उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सभी बालिकाओं को एक शपथ दिलाई कि  “मैं यह प्रयत्न करूंगी कि मैं अपने आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर ले जाऊंगी”.

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