अभियान में सौ फीसदी बच्चों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य सुनिश्चित करें-नेहा गिरि | Dholpur

अभियान में सौ फीसदी बच्चों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य सुनिश्चित करें-नेहा गिरि | Dholpur

अभियान में सौ फीसदी बच्चों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य सुनिश्चित करें-नेहा गिरि

धौलपुर 20 मई, जिले में बच्चों को रूबेला व खसरा रोग से बचाने के लिए खसरा-रूबेला एम आर के निःशुल्क टीके लगाए जाएगें। जिला कलक्टर नेहा गिरि ने बताया कि जुलाई के दूसरे सप्ताह से शुरू होने वाले मिजल्स रूबेला अभियान के तहत सभी सरकारी व निजी स्कूलों एवं मदरसों में नौ माह से पंद्रह साल तक की आयु के सभी बच्चों को ये टीके लागए जाएगें। उन बच्चों को भी टीका लगाया जाएगा, जिन्हें पहले एमआर का टीका लगाया जा चुका है।

टीके से दूर होगी बच्चों की जन्मजात बीमारियांः- टीके के फायदों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस टीके से बच्चों में जन्मजात बीमारियां दूर होगी। बहरापन, मोतियाबिंद व ह्नदय रोग से जुड़ी बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। अभियान पहले दो से तीन सप्ताह स्कूलों में चलेगा। चौथे व पाचवें सप्ताह गांवो व शहरी क्षेत्रों में आउटरीच शिविरों एवं मोबाइल टीमों के जरिए स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों व छूटे हुए बच्चों के टीके लगाए जाएंगे। अभियान में सौ फीसदी बच्चों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य तब किया गया है। कम से कम 95 प्रतिशत मूल्यांकन कवरेज होना आवश्यक है। इसके लिए सभी स्कूल पहली से दसवीं कक्षा के बच्चों की संख्या सेक्शन वाइज देंगे।

बुखार, खांसी, जुकाम हैं रोग के प्रमुख लक्षणः- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गोपाल प्रसाद गोयल ने बताया कि खसरा-रूबेला का टीका अत्यंत सुरक्षित टीका है। टीकाकरण अभियान जुलाई में शुरू होगा। देश में खसरा से हर साल करीब पचास हजार बच्चें कालकवलित हो जाते है। उन्होंने सौ फीसदी बच्चों का खसरा-रूबेला का टीकाकरण कराने में सहयोग करने का आग्रह किया। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि खसरा वासरस जनित जानलेवा रोग है। इसके प्रमुख लक्षण बुखार, खांसी, जुकाम, आंखे लाल होना आदि है। बच्चों में खसरे के कारण विकलांगता और अनहोनी होने के खतरा बना रहता है। खसरे के चकते बुखार आने के दो दिन बाद दिखते है। इसमें डायरियां, निमोनियां, मस्तिष्क की सूजन जैसी जटिलताएं भी हो सकती है। कुपोषित बच्चों को भी यह टीका लगाना जरूरी है, क्योंकि ऐसे बच्चों में संक्रमण क आशंका ज्यादा होती है। किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी व तेज बुखार में यह टीका नहीं लगाया जाता।

गर्भवतियों में रूबेला सिंड्रोम होने की रहती है आशंकाः- गर्भवती महिलाओं में रूबेला रोग होने से जन्मजात रूबेला सिंड्रोम हो सकता है। जो गर्भ में पलने वाले नवजात शिशु के लिए बेहद गंभीर हो सकता है। रूबेला से गर्भवती महिलाओं के गर्भपात, नवजात की मौत, नवजात को जन्मजात बीमारी होने का खतरा रहता है। अगर जन्म ले भी लेता है तो उसका जीवन परेशानियों से भरा रहता है। जिसमें आंख में ग्लकोमा, मोतियाबिंद, कान से बहरापन व मस्तिष्क प्रभावित हो सकता है।

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