गंगापुर सिटी प्रशासन के भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे को छुपाने की कोशिश RTI के जरिए आया मामला सामने

गंगापुर सिटी प्रशासन के भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे को छुपाने की कोशिश RTI के जरिए आया मामला सामने

09 जुलाई, 2019 मंगलवार को गंगापुर सिटी शहर में एक बड़े स्तर पर छापामार कार्रवाई होती है जो पूरे शहर को हिला कर रख देती है। एडीएम पंकज ओझा जी, एसडीएम विजेंद्र मीणा जी, पुलिस उपाधीक्षक, तहसीलदार, भू. अभि. निरीक्षक, हल्का पटवारी व अन्य कर्मचारियों-अधिकारियों के साथ नगर परिषद गंगापुर सिटी के ठीक सामने स्थित एडवोकेट राकेश अग्रवाल द्वारा संचालित अग्रवाल नक्शा सेंटर पर छापामार कार्रवाई की जाती है और वहां से 17 से अधिक फाइलें जो कि पट्टा निर्माण से संबंधित है, जब्त की जाती हैं। एक बड़े स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा होता है। लोग खुश होते हैं। ऐसा सोचते हैं कि अब नगर परिषद में कहीं ना कहीं सुधार होगा। लोग ADM पंकज ओझा का आभार व्यक्त करते हैं। लेकिन इस घटना को आज 1 महीने से अधिक समय हो चुका है। क्या आपको पता है कि इस घटना के बाद क्या कार्रवाई हुई ? इस छापामार कार्रवाई के बाद आखिर प्रशासन ने क्या-क्या काम किए ? शहर के एक सोशल एक्टिविस्ट बेअंत सिंह इस मामले में आरटीआई लगाते हैं और उन्हें जो जानकारी प्राप्त होती है उसको जानकर के आप भी चौंक जाएंगे कि हमारा प्रशासन इस भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे में क्या छिपाने की कोशिश कर रहा है।

 

मौका फर्द रिपोर्ट से एडीएम पंकज ओझा का नाम गायब

छापामार कार्रवाई के दौरान गंगापुर सिटी एडीएम पंकज ओझा मौके पर मौजूद थे और उन्होंने ही इस छापामार कार्यवाही की अगुवाई की थी I अखबारों में भी उनके फोटो छपे थे I लोगों ने भी उन्हें धन्यवाद दिया था I लेकिन सूचना अधिकार से यह खुलासा हुआ है कि जो मौका फर्द रिपोर्ट तैयार की गई उसमें एडीएम पंकज ओझा का नाम ही नहीं है I मतलब कार्रवाई की अगुवाई करने वाले का नाम ही मौका फर्द रिपोर्ट से गायब है I सवाल उठता है कि आखिर मौका फर्द रिपोर्ट से उनका नाम गायब क्यों है ? आखिर प्रशासन के द्वारा गुपचुप तरीके से क्या छुपाने की कोशिश की जा रही है ?

 

किसी भी आरोपी के खिलाफ किसी भी तरह की ‘एफआईआर’ दर्ज नहीं करवाई गई

आरटीआई आवेदन में प्राप्त सूचना से यह भी खुलासा हुआ है कि इतनी बड़ी छापामार कार्रवाई के एक माह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी प्रशासन के द्वारा आरोपियों पर किसी भी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई है I अग्रवाल नक्शा सेंटर संचालक अधिवक्ता राजेश अग्रवाल, नगरपरिषद पट्टा शाखा प्रभारी सुरेशचंद, नगर परिषद् सभापति संगीता बोहरा का जिक्र मौका फर्द रिपोर्ट में है I फिर भी प्रशासन ने इनके खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं करवाई I जबकि इतने बड़े मामले में सबसे पहले एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी I एक माह का समय बहुत लम्बा समय है I इससे प्रशासन की विश्वसनीयता पर शक होता है I प्रतीत होता है कि या तो प्रशासन मैनेज हुआ है या प्रशासन को मैनेज कर लिया गया है I जो भी हो पर सवाल तो खड़ा होता है I

 

 

प्रेस नोट भी जारी नहीं किया गया था, ना ही कोई प्रेस कांफ्रेंस हुई

आखिर क्या छुपा रहा है प्रशासन

आप सभी को जानकर ताज्जुब होगा कि छापामार कार्रवाई वाले दिन प्रशासन की ओर से मीडिया को किसी भी तरह का प्रेस नोट जारी नहीं किया गया था और ना ही कोई प्रेस कांफ्रेंस हुई थी I इस बात का भी आरटीआई में खुलासा हुआ है I सोशल एक्टिविस्ट बेअन्त सिंह ने उपखण्ड अधिकारी से छापामार कार्रवाई के दौरान मीडिया को जारी किये गए प्रेस नोट की प्रमाणित प्रतिलिपियाँ उपलब्ध करवाने के लिए कहा था लेकिन जवाब प्राप्त हुआ कि उस दिन प्रशासन की ओर से मीडिया को किसी भी तरह का प्रेस-नोट जारी नहीं किया गया था I

सेवा-नियमों के अनुसार इतनी बड़ी छापामार कार्यवाही होती है तो प्रशासन का दायित्व बनता है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जनता के सामने बातों को रखें I जनता के बीच में उन तथ्यों को पहुंचाएं जो कार्रवाई के दौरान उन्हें पता चले हैं I लेकिन यहां गंगापुर सिटी में जो प्रशासन है वह छापामार कार्रवाई करता है और उसके बाद ना तो प्रेस-नोट रिलीज करता है और ना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है I जबकि अखबारों में आधा-आधा पेज की बड़ी खबर छप जाती है I प्रश्न यह खड़ा होता है कि आखिर जो अखबारों में छपी खबरें हैं उनमें कितनी सच्चाई है ? या तो प्रशासन झूठ बोल रहा है या फिर अखबारों में छपी जो बातें हैं उनमें कहीं झूठ है I आखिर प्रशासन ने मीडिया को प्रेस-नोट रिलीज क्यों नहीं किया ? प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की गई ?

 

प्रशासन की ओर से ना ही कोई वीडियोग्राफी की गई और ना ही कोई फोटोग्राफी

आरटीआई से यह भी खुलासा हुआ है कि प्रशासन ने छापामार कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की वीडियोग्राफी नहीं करवाई और ना ही फोटोग्राफी I जब आवेदन में उनसे पूछा गया कि आपके द्वारा छापामार कार्रवाई के दौरान जो वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करवाई गयी उसे उपलब्ध करवाइए, तो उन्होंने जवाब में स्पष्ट किया है कि प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की वीडियोग्राफी नहीं करवाई गई थी और ना ही कोई फोटोग्राफी करवाई गई थी I

 

प्रशासन की नीयत पर भी एक प्रश्न खड़ा करता है कि उनको ऐसा क्या डर रहा, वह क्या छिपाना चाह रहे थे जिसकी वजह से उन्होंने वीडियोग्राफी करवाना भी उचित नहीं समझा I जबकि प्रशासन को इतनी बड़ी कार्रवाई को अमल में लाने से पहले इस बात की भी छूट रहती है कि वह अपने स्तर पर ऐसी कार्रवाई के लिए वीडियोग्राफी जरूर करवाएं I

कुल मिलाकर सार यह है कि प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश में है क्यूंकि इस मामले में उन लोगों के नाम शामिल हो गए हैं जो बड़े-बड़े लोगों के लिए काम करते हैं I जबकि इस तरह के भ्रष्टाचार अथवा धांधलियों के लिए सीधे 5 साल और आजीवन तक कारावास हो सकता है व जुर्माना अलग से I कार्रवाई न होने पर सवाल यह भी बनता है कि क्या यह सब मात्र एक राजनीतिक दवाब की वजह से छापामार कार्रवाई थी ? जनता प्रशासन पर विश्वास कैसे करे !

About Beant Singh Chaudhary

Freelance Journalist, Social Activist, Coloumn Writer, belongs to Rajasthan state worked with Zee News Rajasthan and other local newspapers