धौलपुर. दलित युवक को चारपाई पर बैठा देख भड़का सवर्ण। नेशनल हाईवे-123 स्थित बसे रजौराखुर्द गांव का मामला |

धौलपुर. दलित युवक को चारपाई पर बैठा देख भड़का सवर्ण। नेशनल हाईवे-123 स्थित बसे रजौराखुर्द गांव का मामला |

जी हां जिले में आज अनुसूचित जाति यानि एससी वर्ग अपने ऊपर होते चले आज रहे जातिपांत छुआछूत अस्पृशता जैसे अत्याचारों का कितना दंश झेल रहा है।इस बात का अंदाजा शायद हाल ही में गांव में घटित हुये घटनाक्रम के इस वाक्या से लगाया जाता सकता है।

मामला राजस्थान राज्य के धौलपुर जिले बीच बसे सैंपऊ पंचायत समिति के हाईवे-123 किनारे गांव रजौराखुर्द का है।

जहां गांव के एक ही जाटव जाति के दलित युवक को अपनी खाट पर बैठा देखकर उच्च जाति का खाट मालिक सवर्ण व्यक्ति भड़क गया।
इतना ही नहीं खाट मालिक ने तुरंत खाट पर बैठे दलित जाटव जाति के युवक को उठवाकर खरी खोटी ही नहीं सुनाई बल्कि जाति सूचक शब्द आदि कहकर अपमानित भी कर दिया।

लोगों से मिली जानकारी के अनुसार घटनाक्रम में जब खाट मालिक का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ तो उस दलित युवक को आगे से ऐसा करने पर जमीन में जिंन्दा गाढ़ने की एक धमकी भी दे डाली मौंके पर खड़े कुछ लोगों से मिली जानकारी के अनुसार।
घटित मामले वाक्या को बढ़ता देख मौंके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। और आईन्दा खाट पर नहीं बैठे जाने की बात कहकर मामले को रफा- दफा कर शांत करवा दिया।

जब मामले की भनक गंगापुर सिटी पोर्टल न्यूज से जुड़े अमित कुमार उन्देरिया को लगी तो मामले को लेकर उस दलित युवक से मिलना चाहा।

लेकिन युवक ड़र से सहमा होने के चलते गंगापुर सिटी पोर्टल से नहीं बात कर सका और नाहीं अपने साथ घटित हुये वाक्य घटनाक्रम को शेयर करना चाहता।

मामले को लेकर बता दें कि रोड़ किनारे खाट मालिक की दुकान होने के साथ चारपाई दुकान के पास बिछी थी।
जिस पर गलती से वह दलित युवक का बैठना बताया गया।

खाट चारपाई पर बैठने को लेकर पहले भी एक ठाकुर जाति के लोगों द्वारा अपमानित हो चुकी है गांव की दलित आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता

खबर के चलते बता दें कि बीते कुछ समय पहले एक गांव में बनी आंगनबाड़ी दलित महिला कार्यकर्ता जब अपने आंगनबाडी काम से एक ठाकुर जाति के घर पहुंच कर घर में बिछी खाट चारपाई पर बैठ गई थी।

महिला कार्यकर्ता को देखकर घर परिवार का पडौसी ठाकुर भड़क गया और दलित महिला कार्यकर्ता को खाट से उठाते हुये खरी खोटी सुनाकर जाति सूचक शब्दों अपमानित कर दिया।

अपमानित दलित महिला कार्यकर्ता गांव में पंचायत सरपंच रहे परिवार में महिला सरपंच की एक लड़के की बहू थी।
जातिवाद-छुआछूत का मिलता- जुलता ऐसा ही एक मामला बसेड़ी के गांव धौर्य में भी बीते समय देखने को मिला था।
जब कस्बा रजौराखुर्द गांव से धौर्य गांव पहुंची एक जाटव समाज की बारात में शामिल एक बाराती ने बरात चढाई के दौरान अनजाने में एक उच्च जाति कहलाये जाने वाले सवर्ण के घर में रखे पानी के घढ़े को अपने जाति के घर का घढा़ समझकर घढ़े से पानी भरकर पानी पी लिया।

इतने में घढा मालिक सवर्ण व्यक्ति भड़क गया और दलित बाराती को बुरा भला कहते हुये गुस्से में घढ़े को लाठी डंडों से पीटकर बारातियों के सामने ही घढ़े को फोड़ दिया।

अब सोचिये जिस भारत देश नेता राजनेता पब्लिक के सामने मानवता भाई- चारे की भावना को लेकर अपनी राजनीति में बड़े- बडे दावे ठोकर बड़े बोलते बोल रहे हैं।
उनके देश में इस तरह की बात होना आज बड़े एक शर्म वाली बात होगी।

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