आज आदर्श गांव रजौराखुर्द मना रहा है करीब पांच सौ वीं बर्ष गांठ

आज आदर्श गांव रजौराखुर्द  मना रहा है करीब पांच सौ वीं बर्ष गांठ

राजस्थान धौलपुर जिला मुखालय से करीब पच्चीस किलोमीटर दूर सैंपऊ पंचायत समिति अन्तर्गत संवत 1576 सन्न 1518 यानि करीब 500 बर्ष पूर्व नेशनल हाईवे संख्या-123 पर बसा गाम पंचायत रजौराखुर्द आज एक अपने आप में एक आदर्श गाम पंचायत के रूप में आज अपनी एक अलग छवि छोड़ रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक गांव की छवि को लेकर आपको हम बता दें कि इस गांव के ग्रामींण लोग रतनपुर से परमार ठाकुर, उन्देरिया जाटव, गुधैनियां बाह्मण व संवरबार कुशका एक कारण वश गांव से पलायन कर वर्तमान में जीवन व्यतीत कर रहे गांव रजौराखुर्द में आये जब वहां पूरी तरह से एक कलार जाति का आधिपत्य था। जहां उनको एक हुये युध्द में हराकर भगाया गया था।

इसी इतिहास को लेकर आज आदर्श गांव रजौराखुर्द आज करीब अपनी पांच सौ वीं बर्ष गांठ को मना रहा है।

करीब 600 घरों की आबादी के बीच बसा है आदर्श गांव रजौराखुर्द।

अगर गांव को लेकर एक नजर से देखा जाये तो यह गांव आज करीब 600 घरों की आबादी के बीच बसा हुआ है। जहां गांव में आज इक्कीस तरह की जातियां है।

ठाकुर परमार के वंशज गजसिंह परमार के नाम से जाना जाने वाला यह गांव आज पूरी तरह से खुशहाल और हरियाली भरा एक सम्पन्न गांव है। गांव के अंदर सरकारी विधालय से लेकर सरकारी उपस्वास्थय केन्द्र तक आदि कई सुविधायें हैं। जहां अस्पृशता जातिपांत और छूआछूत नां के बराबर होकर एक कोसों दूर है।

गांव के अंदर गांव के नामी ठाकुर गजसिंह परमार की बाईस दरवाजों की बनी एक हवेली आज भी मौंजूद है। जहां गांव की इस हवेली को लेकर अन्य लोगों के साथ गांव की बडी़ जाटव बस्ती निवासी और शिछा विभाग से रिटार्यड़ प्राधानाध्यापक और संविदा के तहत जिले में छाञावास अधीछक पद पर अपनी सेत दे चुके पैंसठ बर्षीय नेञपाल सिंह जाटव से मिली जानकारी के मुताबिक इस हवेली में धौलपुर के राजा उदयभान सिंह समय-समय पर आकर इस हवेली की शोभा को बढाया करते थे। जहां गांव के अंदर एक राजाशाही कुंआ भी मौंजूद है। जो गांव की जलापूर्ति के पहले भी और आज भी काम आ रहा है।

आजादी के गांव के पहले सरपंच वेदसिंह परमार ने गांव का सरपंच बनकर इस गांव की कमांन संभाली थी। इसके बाद गांव के बीरवल कुशवाह, रामसिंह शर्मा,शिवनारायंण सिंह ठाकुर, रामजीलाल कुशवाह, कोकिला जाटव, मन्नालाल कुशवाह गांव के सरपंच पद की कमान संभाल कर इस गांव की सरपंची कर चुकें हैं। जहां अब गांव के वर्तमान सरपंच तोताराम कुशवाह सरपंची की कमान संभाल रहे हैं। आदि बातों को बताये जाने के साथ गांव के बुर्जुर्ग लोगों के हिसाब से इस गांव की एक ओर बात बता दें कि इस गांव की आज पच्चीस वीं पीढी़ चल रही है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक गांव के हवेली थोक आठ बिस्वा के जमींदार ही गांव का राजस्व इकठ्ठा करते थे। गांंव के अंदर पहले काफी जमींन थी लेकिन करीब ढेड़ सौ बर्ष पूर्व चौबीस बास से एक औरत के ऊपर एक दिन एक भंयकर संग्राम हुआ जिसमें गांव के बगल में बसे सैंपऊ गांव की करीब सात सौ औरतें अपना मांथे का सिंदूर गवां चुकी थी। जहां उन औरतों को दो बीघा जमीन देने के हिसाब से गांव की करीब चौदस सौ बीघा जमीन दान में चली गयी। जिसमें चंदू का नगला ठाकुर दास का नगला, गेंदूपुरा आदि गांव भी शामिल हैं।

जहां आज गांव में यातायात साधनों की बात की जाये तो करीब आज इस गांव में सौ ट्रैक्टर-ट्रौलियां हैं।

रजौराखुर्द की एक बिशेष

धौलपुर से रिर्पोट अमित कुमार उन्देरिया

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