हजारी बाला कुआँ बामनवास का जीर्णोधार ।

हजारी बाला कुआँ बामनवास का जीर्णोधार ।

बामनवास पट्टी खुर्द के इस कुऐ का नाम हजारी वाला कुआ है, और इसका इतिहास यह है कि, किसी जमाने में इस कुऐ के सम्पूर्ण निर्माण का खर्चा एक हजार रुपये आया था, इसी बजह से इस कुएं का नाम हजारी वाला कुआ पडा।

हमारे पूर्वजों ने इस महान पवित्र नबाण का निर्माण केवल पीने के पानी के लिए ही करवाया था, बामनवास का यह कुंआ तीनों पट्टीयों के निवासियों बिना किसी भेदभाव किए सब की प्यास बरसों से बुझाता आ रहा है, मगर जब कुऐ के अस्तित्व को खतरे में देख कर लोगो के सोचने का नजरिया बदला-बदला लगने लगा और कुछ खुसर फुसुर होने की आवाज आने लगी की यह उस समय उनके पूर्वजों ने बताया था, हम इसमें केसे क्या करे।

गत वर्ष से यह कुंआ अपने वजूद को बनाए रखने के लिए संघर्षो से गुजरता हुआ आमजन कि प्यास बुझा रहा है, इस कुऐ का पानी आर ओ और बोतलों के पानी को भी मात देता है, पीने में मीठा और इतना ठंडा कि बाटर कूलर भी इसके आगे फेल है, भरी गर्मी के मौसम अगर कोई भाई ज्यादा देर तक इस कुऐ के पानी से नहाले तो सर्दी के मारे उसके दांत बोलने लग जाए।  मित्रों ऐसे सार्वजनिक कुंए के रख रखाव कि जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के सरपंच कि होती है, मगर ग्राम पंचायत के किसी भी मुखिया ने इस कुऐ कि जर्जर हो चुकी हालात के बारे में कभी भी गंभीरता से नहीं सोचा। जिसके कारण इस कुऐ कि गत वर्ष झरी बैठ गई।  जिसके कारण इस कुऐ का पानी कम पड़ता गया और पानी का स्वभाव भी अच्छा नहीं रहा।

कुएं पर पानी लेने जाने बाली महिलाओं ने अपने अपने घरों में जाकर सभी पूरूषो से इस कुऐ कि स्थिति के बारे में बताया तो कुछ गांव बालो ने सरपंच जी से कई बार इसे कुऐ को सुधारने व मरम्मत कराने के लिए बोला था, मगर सरपंच जी को इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है।

मगर अब बरसात का मौसम है तो कुऐ को नुकसान भी बहुत ज्यादा होने लगा, तभी महिलाओं ने भी अपने अपने स्वर तेज कर दिए और कुछ महिलाओं ने यहां तक कह दिया कि जब कुआ ही नहीं रहेगा तो फिर यह जो तुम लोग बार बार ठंडे पानी की मांग करते हो ना बो कहा से पीयोगे और हम कल से पानी लेने नहीं जाने वाली है, खुद एक बार पानी लेकर आओ तब पता चलेगा कि यह जो तुम लोग सीधा साधा पानी पी रहे हो ना उसी पानी को हम महिलाऐ अपनी अपनी जान को रोज जोखिम डालकर लाते हैं।

फिर क्या था, इस बात को लेकर कुछ लोग गंभीर रूप से सोचने लगे और एक दूसरे कहने लगे कि वो जो हजारी का कुआ है ना उसकी झरी बैठने से कुंआ गीरने की कगार पर है चलो उसे ठीक करने के लिए कुछ करते हैं।

गांव के बढे बुजुर्गों व युवा साथियों से इस मीशन के लिए सहयोग मांगा तो सब बडी बडी बाते करते रहे और कहते रहते चलते हैं तू चल मुझे थौडा काम है में उस काम को करके आता हूँ। बस अभी आ रहे हैं बस तूम लोग पहुंचे नहीं कि मै आया ऐसी ऐसी बात कही लोगों ने ओर हम हजारी वाले कुंए को ठीक करने के लिए चले गये थे। हमारे वहां पहुंचने के बाद एक भी आदमी उस जगह पर नहीं पहुचा फिर हम लोगों ने ही इस मीशन को आगे बढ़ाने के लिए अपनी अपनी कमर कस ली और हजारी वाला कुऐ कि झरी को भरा और बहा पर उग रहे किकरो व गढो को भरा।
इस नेक कार्य में हमारे साथियों ने खुब महनत की और इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाया है बढे बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं के जोश के चलते किसी जमाने में हजार रुपये में बने इस कुऐ कि गत सुधार के ही दम लिया। कार्य को करने बाले साथी कमलेश भाई जी, भाई सुकराम माली जी, मनीष बामनवास, भैरूलाल जी पटेल, पूर्व उप सरपंच हरकेश जी, पाईलेट जी, बीपी जी, ब्रजलाल जी पटेल।

सात दिन में प्राचीन सार्वजनिक हजारी बाले कुंए का जीर्णोदार कर आमजन को पीने के पानी के लिए राहत प्रदान करने का आश्वासन विकास अधिकारी व जिला प्रशासन द्वारा दिया गया है।

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