हाईवे मार्ग से गुजरकर रोजाना खुलेआम हो रहा हजारों टन लाल रेता बजरी का व्यापार।

हाईवे मार्ग से गुजरकर रोजाना खुलेआम हो रहा हजारों टन लाल रेता बजरी का व्यापार।

हाईवे मार्ग से गुजरकर रोजाना खुलेआम हो रहा हजारों टन लाल रेता बजरी का व्यापार। 

                           बजरी खनन पर लगे रोक आदेश की निकल रही हवा।

जी हां धौलपुर जिले के सैंपऊ तसीमों स्थित बनी पार्वती नदी किनारे बनें नदी तटों की जमीन से खोदी जा रही लाल रेता बजरी का आज रेता माफियाओं द्वारा एक बड़े पैमानें पर ट्रैक्टर-ट्रौलियों में भरकर व्यापार किया जा रहा है।

जिसका फायदा रास्ते में मिलने वाली पुलिस भी उठा रही है। जो आज प्रत्येक रेता भरी ट्रौली को निकालने का कम से कम ट्रैक्टर चालक सौ रुपया तक ले रही है।

बता दें राजस्थान धौलपुर जिले की सीमा भीतर नेशनल हाईवे मार्ग संख्या एक सौ तेईस किनारे बने रजौराखुर्द कस्बे से होकर रोजाना लाल रेता बजरी गुजरकर भरतपुर जिले की सीमा तक प्रवेश कर रही हैं।

जहां रास्ते में कई पुलिस की चौकियां भी हैं।

कभी-कभार जिला प्रशासन की नजर अपनी उज्जवल छवि बनाने को लेकर संम्बधित विभाग कार्यवाही भी कर देता है। और की भी जा रही है।

इतनां ही नहीं तसीमों चौराखेरा सैंपऊ कस्बा स्थित बनी पार्वती नदी किनारे बनी जमीन से निकाली जा रही लाल बजरी का रेता माफियां व्यापारियों द्वारा आस-पास के छेञों में जगनेर खेरागढ़ कागारोल बाडी़ में भी बेचकर इसका बडे़ पैंमाने पर व्यापार किया जा रहा है।

अगर देखा जाये तो लाल रेता बजरी का व्यापार यहां के नजदीकी ट्रैक्टर मालिकों का आज यह एक रोजगार का जरिया बन गया है।    

साथ ही बता दें ज्यादातर बजरी का व्यापार करने वाले ट्रैक्टर-ट्रौलियों की संख्या रजौराखुर्द स्थित बने नेशनल हाईवे एक सौ तेईस पर सुबह के वक्त देखने को मिलती है।

क्योंकि ज्यादातर लाल रेता बजरी का दोहने करने वाले ट्रैक्टर मालिक राजस्थान धौलपुर जिले के रजौराखुर्द कस्बे और कस्बे के बने पास के गांवों के ही हैं।

इसके साथ ही एक गुप्त जानकारी के मुताबिक आपको हम बता दें कि नेशनल हाईवे एक सौ तेईस पर बने रजौराखुर्द कस्बे होकर रुपवास भरतपुर की ओर जाने वाले बजरी ट्रैक्टरों की ट्रैक्टर चालकों से रुपवास छेञ में घसते ही पूरे दो हजार रुपये की एंट्री भी ली जाती है।रुपयों की एंट्री नहीं देने पर ट्रैक्टरों पर कार्यवाही कर दी जाती है।

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