दोनों आंखों की रोशनी से कोसों दूर सात बर्षीय मासूम रवी

दोनों आंखों की रोशनी से कोसों दूर सात बर्षीय मासूम रवी

दोनों आंखों की रोशनी से कोसों दूर सात बर्षीय मासूम रवी को नहीं पता कि आज दिन रात कैसे होते है और क्या होती संसार में मानव जाति नहीं देखा अपने पिता के घर का आंगन की जमीन जहां आज वह खेल पलकर बडा़ हो रहा है।

जी हां यह दर्द भरी कहानी है राजस्थान धौलपुर जिले के एक सैंपऊ पंचायत समिति अन्तर्गत बसे रजौराखुर्द कस्बे की जाटव बस्ती में करीब सात बर्ष पहले जन्में मासूम रवी जाटव की।

जिसकी जन्म से ही आज दोनों आंख नही है। जिस कारण रजौराखुर्द का सात बर्षीय न तो किसी को देख पाता है और नांहीं किसी को आज पहचान सकता है।

पहचान सकता है तो रवी केवल अपने मां बैंजन्ती बाप महेश और बहिन भाई रुपेश सरिता के साथ बडी़ बहिन राखी जाटव की आवाज को।

हमारे रिर्पोटर अमित कुमार उन्देरिया रजौराखुर्द से हुई रवी के पिता महेश जाटव की बात पर बता दें कि आज रवी को सरकार की ओर सुविधा के नाम पर कुछी चंद महीनों पहले लागू हुई पेन्शन ही मिल रही है।

जिसके सहारे रवी अपने लिये दुकान से कुछ खाने पीने की खट्टी- मीठी  चीजें मंगवाकर केवल उनका स्वाद ही चख पाता है।  नकि उन्हें देख पाता है। कि इसका रंग कलर कैसा और क्या होता है।

वहीं बताया कि जयपुर में कुछ डॉक्टरों को रवी की आंखों को लेकर दिखाया भी था लेकिन उम्मीद की कोई किरण नहीं दिखी।

रजौराखुर्द अपनी जन्म भूमि पर बडी़ बहिन सरिता के साथ बैठा मासूम सात बर्षीय रवी।

रिपोर्टर अमित कुमार धौलपुर

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