लोगों की आस्था का केन्द्र पार्वती बांध शिवमंदिर | Dholpur

लोगों की आस्था का केन्द्र पार्वती बांध शिवमंदिर | Dholpur

लोगों की आस्था का केन्द्र पार्वती बांध शिवमंदिर।

आखिर क्या है इस मंदिर की कहानी के पीछे का सच।

जानने के लिये देखिये धौलपुर रिर्पोटर अमित कुमार उन्देरिया की यह खास रिर्पोट।

राजस्थान धौलपुर जिला मुख्यालय से करीब अस्सी किलोमीटर दूर आंगई कस्बे स्थित धौलपुर करौली हाईवे बगल बने पार्वती बांध में बना शिवमंदिर आज लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। 

यहां रोजाना सैंकडों की संख्या में दूर- दूर से लोग आकर मंदिर में बनी भगवान शिव की शिवलिंग रुपी मूर्ति के दर्शन कर अपनी मन की मनोकामनां को पूर्ण करते हैं।

यहां सबसे खास बात तो यह है शिव मंदिर के बगल ही मंदिर से सटकर जिले का प्रसिध्द मानां जाने वाला पार्वती बांध भी बना हुआ है। जो वास्तव में आज देखने लायक बना होकर लोगों का आर्कषंण का केन्द्र बना हुआ है। जहां आये- दिन देखने वाले लोगों के साथ सैलानियों का आना जाना भी लगा रहता है।

वहीं अगर पार्वती बांध में बने इस शिवमंदिर को लेकर आस-पास बसे गांव हीरापुरा, बैरपुरा, आंगई, कुरिगमां आदि गांव के कुछ बडे़ बुर्जुगों की मानकर मंदिर के पुजारी बाबा बिहारी दास बसेडी़ की मांने तो इस शिव मंदिर का बांध मे कई बर्ष पुराना स्थान है।

बताते हैं कि मंदिर के स्थान वाली जमीन के पास बर्षों पहले पानी और घनी झाड़ियों के बीच एक मिट्टी और पत्थरों का छोटा चबूतरा बना हुआ था। 

जिस चबूतरे पर एक शिवलिंग आकार का एक पत्थर की मूर्ति रखी हुई थी।

जहां आज दूसरी ओर मंदिर की चारों तरफ से बनी पक्की दीवाल वाली इस अजब कहानी को लेकर बूढ़े-बडे़ लोगों की मानें तो बीते समय बर्ष उन्नीस सौ सतानवें की साल में जब पार्वती बांध का पक्का निर्माण हुआ था तो बांध का निर्माण कराने आयीं दिल्ली की एक मशहूर हरीशचन्द्र नामक कम्पनी की सारी मशीनों ने एक के बाद एक मशीन अचानक बंद होना शुरु कर दिया। 

जिस संकट की घडी़ में बांध निर्माण कराने वाला कम्पनी का ठेकेदार बांध निर्माण के लेकर भारी चिंता में पड़ गया।

उस वक्त ऐसी स्थिति में ठेकेदार ने बांध की जमीन में बगल बने इस चबूतरे रुपी शिवलिंग पर अपना माथा टेककर बांध को सही सलामत बनाये जाने की मन्नत मांगी साथ ही इस ठेकेदार ने बांध की मन्नत पूरी होने पर मंदिर का चारों तरफ से पक्का निर्माण कराकर मंदिर बनाये जाने का हवाला दिया। वहीं कुछ बुर्जुगों लोग मंदिर की कहानी को लेकर यह भी बताते हैं कि बांध बनाने वाले ठेकेदार की सभी मशीने अचानक खराब होकर बंद हो गयी। इस दौरान ठेकेदार को भारी परेशानी का सामना करना पडा। जहां

अचानक एक रात ठेकेदार को राञि के समय भगवान शिव ने आकर अपना सपना दिया और सपने में सबसे पहले भगवान शिव ने चबूतरे रुपी शिवलिंग को पक्के मंदिर रुपी निर्माण में बदलकर एक पक्का मंदिर बनाये जाने की बात कही। 

आखिर मंदिर के पक्के निर्माण वाली बात को लेकर कहानी के पीछे कहानी सच क्या है और क्या नहीं यह तो बीता समय ही जानता होगा। 

परन्तु हम इतना जरुर बता देतें हैं कि इस मंदिर का पक्का निर्माण कार्य बांध के पक्के निर्माण कार्य के दौरान ही हुआ है।

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